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Women Protest at Khori Gaon - Press Release 14.06.21

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"The Struggle for Rehabilitation continues in Khori"

"Eviction without Rehabilitation is a death sentence."

"Women of Khori staged a protest demanding their rights for rehabilitation!"

In order to comply with the order given by the Supreme Court on 7 June 2021, the Faridabad administration and the Faridabad Municipal Corporation announced the deployment of a large police force today along with an order to evacuate to force the people of Khori village to leave their homes. However, today the women of Khori village demanded rehabilitation in a baithak (protest) in the middle of the village.

The women sitting in Khori are demanding rehabilitation. They are imploring that the government understand that evictions without rehabilitation, especially during the COVID pandemic, are a death sentence by the government to the people of Khori Village.

On a slightly hopeful note, the 15 people who had been jailed for the past 3 days for protesting for their basic rights were released today with bail in the District Court of Faridabad.

Sitadevi of Khori village has been living in Khori village for the last 15 years. She is a single woman and she says that there is no one in her family to help her if she is evicted. She will die under the open sky if she is evicted. "Whose government will be responsible?", she asks. Mamta says that her husband works as labour and for the last one and a half years, their family has had no income, forcing them to beg and live. By not providing rehabilitation, the government is doing her a huge injustice.

Rehana Begum, who is a single woman, said that she is the only woman in her family and a widowed woman won't get work anywhere, especially at this age. She is alive only because of the atmosphere and support of her community, who help her with food and water. However, if her home itself is destroyed, then this support system too, will vanish. She is asking this question to the Chief Minister as to why the government is not supporting her in these difficult times.

A woman named Kalpana shared that her husband left her and she has been living in Khori village for the last 10 years. Despite the order of the Supreme Court, she has been hoping that the government will help her with rehabilitation and her struggles in this pandemic. She still carries this hope, though the government has taken no steps as of now to support her in this issue.

Nirmal Gorana, general secretary of Bandhua Mukti Morcha, said that the Supreme Court has ordered eviction, but the government is depriving the slum dwellers of their right of rehabilitation. The government should carry out its role with justice and care, as is their responsibility. However, if the government runs away from its responsibility, then it is strangling social justice.

The government should follow the orders of the Supreme Court in a planned manner rather than acting impulsively and oppressing the already marginalized Khori Village residents who are at the bottom of the social hierarchy. It is injustice if proper rehabilitation is not provided.

Nilesh and Rana Paul of Basti Suraksha Manch said that more than one thousand emails have been received by the Chief Minister of Haryana Government and Deputy Commissioner and Municipal Commissioner of Faridabad district from many organizations. However, none of the top officials and representatives of the government have acknowledged any such emails nor has there been any mentioned in the media and public. This proves that the government has no plan for rehabilitation and is using the Supreme Court order as an excuse. There are many rich structures such as luxury hotels encroaching into the Aravalli forest range, Faridabad, however, the government and administration have turned a blind eye to them and are instead targeting the poor.

Vimal Bhai of the National Coalition of People's Movements (NAPM) said that the government should file a plan to send this population to the Supreme Court by the next date. In the Corona period, the government will have to protect the environment by adopting a very humane approach from across the state.

Nirmal Gorana

General Secretary

Bandhu Mukti Morcha




"पुनर्वास की आस में आज भी खोरी संघर्ष की राह पर"

"पुनर्वास के बिना बेदखली मृत्यु दंड"

"खोरी गांव में महिलाएं बस्ती के बीचो बीच पुनर्वास की मांग को लेकर बैठी"

7 जून 2021 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश की पालना करने के लिए फरीदाबाद प्रशासन एवं फरीदाबाद नगर निगम ने वृहद पैमाने पर पुलिस बल तैनात करने के साथ खोरी गांव के लोगों को घर छोड़ने की घोषणा की किंतु आज खोरी गांव की महिलाएं पुनर्वास की मांग को लेकर खोरी गांव के बीचो बीच बैठ गई हैं।

पुनर्वास की मांग को लेकर खोरी में बैठी हुई महिलाएं कोरोना की महामारी में सरकार से सवाल पूछ रही है की बिना पुनर्वास के सरकार खोरी के परिवारों को बेदखल कर रही है जो कि इस महामारी में सरकार की ओर से खोरी गांव के लोगों को दिया गया मृत्यु दंड है।

उधर पिछले 3 दिनों से खोरी गांव के 15 व्यक्ति जोकि खोरी गांव के मसले को लेकर पिछले 3 दिन से जेल काट रहे थे आज डिस्टिक कोर्ट फरीदाबाद में इन तमाम 15 लोगों को जमानत के साथ रिहा कर दिया गया है।

खोरी गांव की सीतादेवी पिछले 15 साल से खोरी गांव में रह रही है | यह एक एकल नारी है इनका कहना है | कि किसी भी प्रकार की सहायता करने वाला सीता के परिवार में कोई नहीं है | ऐसी कोरोना की महामारी में वह खुले आसमान के नीचे ही मर जाएगी जिसकी जिम्मेदार सरकार होगी।

ममता का कहना है कि उसके पति बेलदार का काम करते हैं और पिछले डेढ़ वर्ष से उनके परिवार में किसी भी प्रकार की कोई आमदनी नहीं हुई जिसकी वजह से मांग मांग कर वह अपना गुजारा कर रही है | अब सरकार उसके साथ पुनर्वास न देकर अन्याय कर रही है l

रेहाना बेगम एकल नारी है | वह अपने परिवार में अकेली महिला है और एक विधवा महिला को इस उम्र में कहीं पर भी कोई रोजगार नहीं मिल रहा है | किंतु घर का आशियाना है जिसकी वजह से वह जिंदा है | आसपास के लोग उसे खाने पीने में भी मदद करते हैं | किंतु जब घर ही उजड़ जाएगा तो उसका कोई सहारा नहीं रहेगा। सरकार उसका सहारा क्यों नही बन रही है यह सवाल वह मुख्यमंत्री से कर रही है।

कल्पना नाम की महिला बताती है कि पति उसको छोड़ कर चला गया है और पिछले 10 वर्ष से व खोरी गांव में अपनी जिंदगी काट रही है । सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद व सरकार की तरफ टकटकी लगाए पुनर्वास की आस में देख रही है कि हरियाणा सरकार उसे इस महामारी और संकट के समय में जरूर राहत देगी । अभी भी उसको पूरी उम्मीद है किंतु सरकार मन है पुनर्वास के मुद्दे पर।

बंधुआ मुक्ति मोर्चा के महासचिव निर्मल गोराना ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने बेदखली के आदेश दिए हैं किंतु सरकार स्लम ड्वेलर्स को उनके पुनर्वास के अधिकार से वंचित कर रही है। सरकार को अपनी भूमिका पूर्ण संवेदनशीलता के साथ अदा करनी चाहिए जो कि उनका दायित्व है | किंतु सरकार यदि अपने दायित्व से भागती है तो यहां पर सामाजिक न्याय का सरकार द्वारा ही गला घोटा जा रहा है।

सरकार को एक योजनाबद्ध तरीके से सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना करनी चाहिए न कि तीव्र आवेश में आकर समाज के अंतिम पायदान पर खड़े इन खोरी गांव निवासियों पर प्रहार कर दिया जाए | यह अन्याय होगा यदि उन्हें समुचित पुनर्वास न प्रदान किया जाए।

बस्ती सुरक्षा मंच के निलेश एवं राणा पॉल ने बताया की कई संगठनों की ओर से हरियाणा सरकार के मुख्यमंत्री एवं फरीदाबाद जिले के उपायुक्त और नगर निगम कमिश्नर को लगभग एक हजार से ज्यादा इमेल प्राप्त हुए हैं | किंतु किसी भी आला अधिकारी एवं सरकार के प्रतिनिधि ने न तो कोई संज्ञान लिया है और नहीं मीडिया और जनता के बीच में उनका जिक्र किया है | इससे यह प्रतीत होता है कि सरकार के पास कोई योजना नहीं है | पुनर्वास से बचने के लिए सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश को बहाना बना रही है | सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना सरकार को जिस ढंग से करनी चाहिए वह सरकार के जेहन में भी नहीं लगता है। फरीदाबाद में अरावली पर्वत माला के इस जंगलात में कई ऐसे स्ट्रक्चर हैं जिनके मालिक अमीर हैं किंतु सरकार एवं प्रशासन उनका जिक्र तक नहीं कर रहे हैं।

जन आंदोलनों की राष्ट्रीय समन्वय के विमल भाई ने बताया कि सरकार को चाहिए कि वह सर्वोच्च न्यायालय को अगली तारीख तक इस आबादी को दूसरी जगह भेजने का योजना दाखिल करें | कोरोना काल में सरकार को अत्यंत मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए पर्यावरण की सुरक्षा करनी होगी |

निर्मल गोराना

जनरल सेक्रेटरी

बंधुआ मुक्ति मोर्चा


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